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महज 23 की उम्र में बना 6000 करोड़ का मालिक, कभी सड़क पर बेचा करते थे सिम।

आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहे हैं जिसने आज बड़े-बड़े अनुभवी बिजनेसमैन और निवेशकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

नई दिल्ली, 10 सितंबर :कहते है की अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा आपके भीतर हो तो तमाम तरह की परेशानियाँ भी आपके सामने घुटने टेक देती है। आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बता रहे हैं जिसने आज Oyo Rooms नाम की कंपनी की शुरुआत कर बड़े-बड़े अनुभवी बिजनेसमैन और निवेशकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसकी शुरुआत 17 साल के एक लड़के ने की थी जो कि आज 6000 करोड़ तक पहुंच गई है।

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इस कंपनी के फाउंडर रितेश अग्रवाल हैं जिन्होंने 17 साल की उम्र में इंजीनियरिंग छोड़ इस कम्पनी की शुरुआत की। रितेश ने ये कंपनी बिना किसी के मदद के शुरू की थी और 6 साल में 6000 तक पहुँच गई है। हाल ही में OYO रूम में जापान के सॉफ्टबैंक ने 250 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। सॉफ्टबैंक का भारत में यह फ्लिपकार्ट के बाद दूसरा सबसे बड़ा निवेश है। ये कंपनी ओयो रूम्स का काम ट्रैवलर्स को सस्ते दामों पर बेहतरीन सुविधाओं के साथ देश के बड़े शहरों में भी उपलब्ध है।

एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि शुरूआती दिनों में उनके पास किराया देने के लिए पैसे नहीं होते थे और कई रातें उन्होंने सीढ़ियों पर बिताई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक समय वे सिम कार्ड भी बेचा करते थे। रितेश का जन्म ओडिशा के बिस्सम कटक गांव में हुआ था। रायगड़ा के सेक्रेट हार्ट स्कूल से उन्होंने पढ़ाई की है। वे शुरू से ही बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग को अपना आदर्श मानते थे।

उन्होंने बताया कि 2009 में वे देहरादून और मसूरी घूमने गए थे। वहां से उन्हें इस बिजनेस के बारे में आइडिया आया। उन्होंने ऑनलाइन सोशल कम्युनिटी बनाने के बारे में सोचा, जहां एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रॉपर्टी के मालिकों और सर्विस प्रोवाइडर्स की सहायता से पर्यटकों को रूम और फूड उपलब्ध करा सकें। उन्होंने 2011 में ओरावेल की शुरुआत की, जिसमे गुड़गांव के मनीष सिन्हा ने निवेश किया और को-फाउंडर बन गए।

इसके बाद देश के पहले एंजल आधारित स्टार्ट-अप एक्सलेरेटर वेंचर नर्सरी एंजल ने उनकी हेल्प की। Oyo ने सॉफ्टबैंक सहित मौजूदा इनवेस्टर्स और हीरो एंटरप्राइज से 25 करोड़ डॉलर (1,600 करोड़ रुपए से अधिक) की नई फंडिंग की है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करना चाहती है।

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