BSF कैंप के पास रहने वाले लोगों का दावा, आधे दामों पर राशन-ईंधन बेचते हैं कुछ अधिकारी।

Advertisement

BSF हेडक्वॉर्टर के आसपास रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि  कुछ अधिकारी उन्हें फ्यूल और राशन का सामान मार्केट से आधे दाम पर बेचते हैं।

नई दिल्ली, 11 जनवरी :BSF के जवान तेज बहादुर यादव के खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर वीडियो जारी किया, जिससे देश में हंगामा खड़ा हो गया है। BSF ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है, हालांकि मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है। वहीं, दूसरी तरफ एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल के कैंपों के आसपास रहने वाले लोगों का दावा है कि कुछ अधिकारी उन्हें फ्यूल और राशन का सामान मार्केट से आधे दाम पर बेचते हैं। BSF के जवान तेज बहादुर यादव ने अपने वीडियो में इस बात का जिक्र किया था।

Advertisement

तेज बहादुर ने वीडियो में दावा किया था कि सरकार राशन का पर्याप्त सामान भेजती है, स्टोर्स भरे पड़े हैं। लेकिन, अधिकारी सामान को सैनिकों तक नहीं पहुंचने देते और सामान बाहर ही बेच देते हैं। श्रीनगर स्थित हुमहमा बीएसएफ हेडक्वॉर्टर के आसपास रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि एयरपोर्ट के आसपास रहने वाले दुकानदार, कुछ बीएसएफ अधिकारियों द्वारा बेचे जाने वाले ईंधन के प्रमुख खरीददार हैं। नाम न उजागर करने की शर्त पर एक और BSF जवान ने कहा, ‘कुछ भ्रष्ट अधिकारी स्थानीय बाजारों में राशन और खाने-पीने की चीजें बेच देते हैं। हम तक सामान पहुंच ही नहीं पाता। यहां तक हमें हमारी दैनिक उपयोग की चीजें भी नहीं मिल पातीं और वे इन्हें बाहर अपने एजेंट्स के माध्यम से मार्केट में आराम से बेच देते हैं।’

Advertisement

न्यूज एजेंसी नवभारत टाइम्स के अनुसार, एक ठेकेदार ने बताया कि ‘हमें मार्केट से आधे दाम पर हुमहमा कैंप के कुछ अधिकारियों से डीजल और पेट्रोल मिल जाता है। इसके अलावा राशन में चावल, मसाले, दाल और रोजमर्रा की चीजें भी बेहद कम दामों में मिल जाती हैं।’ इसके अलावा एक फर्नीचर डीलर ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उसके मुताबिक, ‘ऑफिस और बाकी सरकारी जरूरतों के लिए फर्नीचर खरीदने आने वाले अधिकारी हमसे मोटा कमिशन लेते हैं। उनका कमिशन हमारे मुनाफे से भी ज्यादा होता है। बीएसएफ में कोई ई-टेंडरिंग व्यवस्था नहीं है। अधिकारी आते हैं, अपना कमिशन लेते हैं और फर्नीचर खरीद लेते हैं। कई बार तो उन्हें फर्नीचर की क्वॉलिटी से भी ज्यादा मतलब नहीं होता है।’

यह हाल सिर्फ बीएसएफ का नहीं है बल्कि सीआरपीएफ के कुछ अधिकारियों का भी यही हाल है। सीआरपीएफ के आईजी रविदीप सिंह साही ने कहा कि ‘अगर सप्लाई में किसी तरह की गड़बड़ी है, तो वह इसकी जांच कराएंगे। हमारे जवान हमारी ताकत हैं। उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ उन्होंने दावा किया कि सीआरपीएफ में चीजों को खरीदने की एक स्थापित व्यवस्था है और कोई भी इसका उल्लंघन नहीं कर सकता है।

अन्य सटीक और विश्वशनीय जानकारी के लिए हमारा पेज लाइक करें :-

Related Articles