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इन वजहों से पैदा होते हैं ट्रांसजेंडर बच्चे, प्रेग्नेंसी के दौरान रखें ये सावधानियां।

वैसे लोग जिन्हें न तो पुरुष की कैटेगरी में रखा जाता है और न ही महिला की कैटेगरी में रखा जाता है, ट्रांसजेंडर कहलाते हैं। 

नई दिल्ली, 28 अगस्त :ट्रांसजेंडर वैसे लोग होते हैं जिन्हे न तो पुरुष की कैटेगरी में रखा जाता है और न ही महिला की। ट्रांसजेंडर लोगों में पुरुष और महिला दोनों के ही गुण हो सकते हैं। ऊपर से पुरुष दिखाई देने वाले किसी व्यक्ति में इंटरनल ऑर्गन और गुण महिला के हो सकते हैं और ऐसे ही ऊपर से महिला नजर आने वाले किसी व्यक्ति में पुरुषों वाले गुण और ऑर्गन्स हो सकते हैं।

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इंडियन फर्टिलिटी सोसायटी के चैप्टर हेड और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. रणधीर सिंह के मुताबिक, इसमें प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने के दौरान ही शिशु का लिंग बनता है। शिशु के लिंग निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान ही किसी चोट, टॉक्सिक खान-पान, हॉर्मोनल प्रॉब्लम जैसी किसी वजह से पुरुष या महिला बनने के बजाय दोनों ही लिंगों के ऑर्गन्स या गुण आ जाते हैं। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

बुखार :-प्रेग्नेंसी के शुरूआती 3 महीने में महिला को बुखार आ जाए और उसने कोई हैवी दवाई ले ली हो।

दवा :-प्रेग्नेंसी के दौरान महिला ने कोई ऐसी दवा ले ली हो जिससे शिशु को नुकसान हो सकता है।

टॉक्सिक फूड :-प्रेग्नेंसी के दौरान महिला अगर टॉक्सिक फ़ूड जैसे -केमिकली ट्रीटेड और पेस्टिसाइड्स वाले फ्रूट वेजिटेबल खा लिए हो।

एक्सीडेंट या बीमारी :-प्रेग्नेंसी के 3 महीने में कोई ऐसा एक्सीडेंट या बीमारी जिससे शिशु के ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचा हो।

जेनेटिक डिसऑर्डर :-10 से 15 फीसदी मामलों में जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण भी शिशु के लिंग निर्धारण पर असर पड़ सकता है।

इडियोपैथिक या अज्ञात :-ट्रांसजेंडर बच्चे पैदा होने के अधिकांश मामले इडियोपैथिक होते हैं।

अबॉर्शन की दवा :-अगर महिला ने बिना डॉक्टरी सलाह लिए अपने मन से अबॉर्शन की दवा या फिर घरेलू उपाय आजमाएं हो।

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