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BJP के खिलाफ बाबरी मस्जिद मामले को भुनाने में कांग्रेस हो रही है नाकाम, ये है वजह !

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद थी कि कांग्रेस की ओर से BJP पर जोरदार हमला होगा, पर ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल: बाबरी मस्जिद केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। कोर्ट का फैसला सत्तासीन BJP के खिलाफ आया है। BJP के शीर्ष नेताओं आडवाणी, जोशी, उमा भारती, विनय कटियार सहित 12 नेताओं पर मुकदमा चलाया जायेगा। कोर्ट का आदेश BJP के खिलाफ है फिर भी BJP नेताओं के चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। उसके उल्ट कांग्रेस नेताओं के चेहरे की रौनक गायब है। BJP के राजनीतिक एजेंडे के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला फायदेमंद है। यही वजह है कि बात बात पर सत्ता पक्ष से इस्तीफे की मांग करने वाली कांग्रेस इस मामलें में चुप्पी साधे हुए है। कांग्रेस नेता कुछ भी कहने से बच रहे। कयास लगाये जा रहे की क्या कांग्रेस की खामोशी कट्टर हिंदुत्व एजेंडे के खिलाफ सीधे खड़े होने से परहेज है?

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद थी कि कांग्रेस की ओर से BJP पर जोरदार हमला होगा। पर ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी। कांग्रेसी नेता इस मामले की जगह अमेरिका के वीजा नियमों से होने वाले नुकसान, और राहुल गांधी के कश्मीर के ट्वीट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने कहा- “अब कम से कम ये पता चल गया है कि कानून का महत्व बरकरार है।” और उधर BJP नेत्री उमा भारती ने साफ एलान कर दिया है- “अयोध्या के मुद्दे पर में फाँसी चढ़ने को तैयार हूँ”।

1992 में आडवाणी का रथ रोकने वाले लालू यादव जरूर इस मामले को अलग नजरिये से देख रहे। उनके मुताबिक इस सब के पीछे का मकसद राष्ट्रपति पद के लिए आडवाणी का पत्ता साफ करना। CBI केंद्र के अधीन है। इसलिए CBI वही करती है जो केंद्र सरकार चाहती है।

कोर्ट का फैसला BJP के हक में ही है। कोर्ट के आदेशानुसार 2 साल तक यह मुकदमा चलेगा। इस से सम्बंधित खबरें 2 साल तक सुर्खियों में रहेंगी। जो BJP के परम्परागत वोटरों को जोड़ेगी। BJP के नेताओं पर मुकदमा से आम जनता में यह संदेश जायेगी कि आम मंदिर मुद्दा BJP की प्राथमिकता है चुनावी वायदा नहीं। जिससे BJP के कट्टर हिंदुत्ववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने में कारगर सिद्ध होगी। कोर्ट की निर्धारित अवधि तक जो भी फैसला आएगा उससे BJP को लाभ मिलना लाजिमी है। 2019 तक कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हो चुके होंगे। कोर्ट के फैसले ने BJP जो राष्ट्रीय बहस का मुद्दा प्रदान किया है। इस मुद्दे को चर्चा में लाने के लिए BJP को कुछ भी करने की जरुरत नहीं।

कोर्ट का फैसला BJP के उन्हीं नेताओं को प्रभावित करेगा जो अब मेनस्ट्रीम का हिस्सा नहीं। जो हाशिये पर चले गए। इससे BJP की सेहत पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा। अगर दोष साबित हुआ तो सियासी शहीदों की नई कतार सहानुभूति बटोरेगी और अगर बच गए तो भी फायदा। BJP के लिए तो पांचों उंगलियां घी में और सर कढ़ाई में।

मायावती के पास दलित मुद्दा, सपा के पास यादव वोट था BJP विरोधी एजेंडा, लालू के पास भी आरक्षण खत्म करने के विरोध में खड़े होने का मजबूत एजेंडा, केजरीवाल के पास भ्रष्टाचार और विरोध की आवाज जैसे औजार है पर, कांग्रेस बेचारी क्या करे? उससे ना तो जनता को ही उम्मीद और ना ही पार्टी को ही। लगातार हार और चौतरफा आलोचनाओं से घिरी कांग्रेस धर्म निरपेक्षता के बहस में पिछड़ रही। इस मामलें में बोल कर जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

इस मामलें में पड़ कर बहुसंख्यक हिन्दू वोटरों को नाराज नहीं कर सकती। दिल्ली MCD चुनाव और गुजरात चुनाव अभी सर पर है। ऐसे में कांग्रेस किसी तरह का जोखिम लेना नहीं चाहती। बाबरी मस्जिद मुद्दे पर कांग्रेस की चुप्पी यही दर्शा रही।

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