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BJP के जीत के पीछे मोदी फैक्टर तो है ही, लेकिन फाइनल रिजल्ट तो अमित शाह के इस “प्रतिशत के खेल” से आता है।

अमित शाह

BJP की धमाकेदार जीत का सेहरा अगर किसी के सर बंधता है तो वो है अमित शाह, इसके पीछे वजहें भी है।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल : BJP ने दिल्ली में निकाय चुनाव दो-तिहाई बहुमत से जीत लिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत से लेकर अब तक के सफर में BJP ने चुनावों में सफलता के कई रंग देखे। हर बार की तरह इस बार भी BJP की इस जीत के सारथी बने BJP अध्यक्ष अमित शाह। मिशन 2019 के लिहाज से दिल्ली MCD छोटा चुनाव है। पर शाह के लिए जीत का कोई विकल्प नही। चुनाव बड़ी हो या छोटी शाह को चाहिए बस जीत। अपनी सटीक रणनीति से अमित शाह पंचायत चुनाव, निकाय चुनाव, विधानसभा चुनाव हर चुनाव में BJP के लिए जीत का मार्ग ढूंढ निकलते है। अब उनका लक्ष्य मिशन 2016 है।

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Center for the study society and Politics के निदेशक प्रो एके वर्मा कहते है कि राजनीति नंबरों का खेल है। जिसके पास ज्यादा नम्बर है वह राज करेगा। अमित शाह इसी फॉर्मूले पर काम करते है। BJP में पोल एजेंट से लेकर पार्टी अध्य्क्ष तक का सफर तय करने वाले शाह ने BJP के पक्ष में जनमत तैयार कर कई राज्यों में सत्ता दिलाई। 2014 के लोकसभा के अलावा महाराष्ट्र, झारखण्ड, हरियाणा, असम, यूपी और उत्तराखंड में जीत दिलवाई।

उन्होंने सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए मौजूदा पार्षदों को टिकट न देने का बड़ा रिस्क लिया। जो काफी फायदेमंद रहा। शतरंज के खिलाड़ी अमित शाह हमेशा सही चाल चलने में यकीन रखते है। पूर्वांचलियों को रिझाने के लिए उन्होंने मनोज तिवारी को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष चुना। वही मनोज तिवारी जिन्होंने कभी सपा की ओर से योगी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा था।

शेयर ट्रेडर रहे अमित शाह प्रतिशत के खेल के माहिर खिलाड़ी है। जीत की दहलीज तक पहुँचने के सारे रास्तों का अध्ययन कर के ही वे अपनी नीति बनाते है। मनोज तिवारी के बाद उन्होंने रवि किशन को पार्टी का हिस्सा बना उन्हें प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी। चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस के की दिग्गजों को BJP में शामिल किया। इस तरह उन्होंने BJP से नाराज खेमों की नाराजगी नरमी में बदल दी। लम्बे समय से भाजपा की रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुभाष निगम के अनुसार शाह ने कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह लवली को तोड़ लिया। इससे जनता में BJP के पक्ष में लहर बनी।

उनलोगों को टिकट देना शुरू किया जो नम्बर बढ़ाने वाले हो। जिसे अन्य पार्टियाँ उपेक्षित रखती थी। उस तबके को उन्होंने BJP से जोड़ा। इस नए समीकरण और जोड़तोड़ कर नई टीम बना शाह ने दिल्ली MCD का किला फतह कर लिया। BJP की हर जीत बस मोदी लहर ही नही है बल्कि इसके पीछे शाह की शाह नीति भी है।

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