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अगर गलती से भी लिया ये नोट तो हो जाएगा रद्दी, भले ही करारा हो।

सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन पर जोर दे रही है मगर, इसके बावजूद देश में लाखों लोग नकद लेन-देन पर ही विश्वास करते हैं। 

नई दिल्ली, 7 सितंबर :आज कल सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन पर जोर दे रही है। मगर, इसके बावजूद देश में लाखों लोग नकद लेन-देन पर ही विश्वास करते हैं। इसलि‍ए हमें यह पता होना जरूरी है कि‍ कब एक अच्‍छा-खासा, साबुत और करारा नोट भी रद्दी हो जाता है। वह नोट चाहे 100 का हो या 2000 का। रिजर्व बैंक ने 3 जुलाई को मास्टर सर्कुलर जारी किया है जिसमे खास तौर पर इसकी हिदायत दी गई है।

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आज हम आपको ऐसे ही कुछ गाइडलाइंस बता रहे है जि‍नमें आपको नोट स्‍वीकार नहीं करना चाहि‍ए। अगर आपने ऐसे नोट को स्‍वीकार कर लिया तो समझ लें कि‍ आपने रद्दी स्‍वीकार की है, भले ही नोट बि‍ल्‍कुल कड़क हो। ऐसे नोट को लेकर आप बैंक में क्लेम नहीं कर सकते। बैंक ने भी नोट की वो कंडीशन भी बताई है, जि‍स तरह का नोट अगर बैंक दे तो नहीं लेना चाहिए।

यदि किसी नोट पर राजनीतिक नारा या संदेश लिखा गया है, तो वैसे नोट को नहीं लेना चाहिए। वे लीगल टेंडर नहीं होते हैं और बैंक इन नोटों पर किसी भी दावे का भुगतान नहीं करेगा। RBI के नोट रि‍फंड रूल्‍स 2009 के 6(3) (iii) के तहत रि‍जेक्‍ट कर दि‍या जाएगा।

मास्टर सर्कुलर में खराब नोटों की परिभाषा भी दी गई है। इसमें गंदे नोटों और विरूपित नोटों के बारे में कहा गया है। गंदे नोट वे हैं, जो समय के साथ या ज्यादा चलन में होने के कारण बदरंग हो जाते हैं। इसमें वे नोट भी शामिल होते हैं, जो लेन-देन में फट जाते हैं और उन्हें इस तरह से जोड़ दिया जाता है, जिससे नोट का कोई सिक्योरिटी फीचर छिपता नहीं है। आमतौर पर आपने भी सेलो टेप लगे ऐसे नोट देखे होंगे।

जब नोट लेन-देन के दौरान दो भागों में फट जाता है और उसका एक हिस्सा खो जाता है। तो ऐसे नोटों को म्यूटेलेटेड नोट्स या विरूपित नोट कहा जाता है। इन्हें हर ब्रांच में नहीं बदला जाता है। ऐसे नोटों के बदले में पूरा मूल्य मिलेगा, आधा मूल्य मिलेगा या कोई पैसा नहीं मिलेगा, यह RBI के नोट रिफंड रूल्स 2009 के तहत तय होता है।

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