ताज़ा खबर

ताज़ा खबर
• बॉलीवुड के इस सिंगर ने एक बच्ची की मां से रचाई थी शादी, विवादों से रहा हैं नाता।
• वनडे टीम से बाहर चल रहे अश्विन ने विराट कोहली को लेकर दिया बयान, मचा हंगामा।
• नाक के आकार से जानिये इंसान का स्वभाव, जानें क्या कहती हैं आपकी नाक आपके बारे में।
• मोदी सरकार के इस नए स्कीम से कमायें 80 हजार प्रति महीने, ऐसे उठाये फायदा.
• JIO के बाद मुकेश अम्बानी का एक और जबर्दस्त धमाका, मात्र इतने रुपये प्रति लीटर मिलेगा पेट्रोल.
• अमिताभ बच्चन की बेटी के बारे में सामने आई ऐसी सच्चाई, सुनकर होश उड़ जायेंगे आपके।
• दीपिका पादुकोण ने किया खुलासा, 55 साल के इस शख्स के साथ करना चाहती है शादी।
• CM योगी ने 10 साल पहले इस लड़की के सिर पर रखा था हाथ, आज तक निभा रहे हैं साथ।
• गुपचुप तरीके ने जहीर खान ने इस बॉलीवुड एक्ट्रेस से रचाई शादी, तो रोहित शर्मा ने कही ये बात।
• USA में जॉब छोड़ गाँव में बकरियां पाल रहा है ये साइंटिस्ट, कमा रहा है लाखों।
• गुजरात चुनाव में PM मोदी ने चल दिया सबसे बड़ा दांव, दंग रह गई कांग्रेस पार्टी।
• गुप्त सुरंग से इस मंदिर में आती थी रानी पद्मावती, दिखती थी कुछ ऐसी।
• धोनी ने किया खुलासा, 2007 में इसलिए बनाया गया था टीम इंडिया का कप्तान।
• शादी की पहली रात दूल्हे ने होटल में पत्नी के साथ किया ऐसा काम, वह हो गई बेहोश।
• 6 साल के लव अफेयर का ऐसे हुआ अंत, BF ने लड़की से रखी थी ऐसी डिमांड।

समय के बढ़ते दबाव और भारतीय परिवार।

NewsToIndia :दरअसल, भारतीय परिवार ही भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत है और वही उसकी सबसे बड़ी सीमा भी। भारत ऊपर-ऊपर से बहुत बदला है और तेजी से बदलता जा रहा है। पर यह उन बुनियादी चीजों से  अधिक नहीं बदल पा रहा है जिन पर इस राष्ट्र का पूरा का पूरा भविष्य टिका हुआ है। आजादी की लड़ाई के दौरान भारतीय जनता जो राजनीतिकरण शुरू हुआ था, लोकतंत्र के पौन सदी के अभ्यास ने उस राजनीतिकरण को और बढ़ाया है। भारतीय जनमानस और राजनीतिक हुआ है। यह बेशक अच्छी बात है। क्योंकि इसे देश “कोऊ नृप होय हमें का हानि ” की मानसिकता सदियों तक बहुत प्रभावी रही है और देश के चौतरफा पतन का कारण भी रही है। मगर चिंता की एक बात है। वह यह की जनता की बढ़ती राजनीतिक सजकता दिशाहीन है। मूल्यविहीन भी है। क्योंकि यह सिर्फ सत्ता की राजनीती से जुडी हुई है।

भारतीय लोकतंत्र के सतत अभ्यास ने सत्ता की राजनीती को मजबूत  किया है। समाज परिवर्तन की राजनीति कमजोर हुई है। हालाँकि बहुत तरह की आर्थिक दवाबों, बदलती तकनीक के आदि के चलते समाज भी कुछ बदला है। पर यह बदलाव पर्याप्त नहीं है। सही दिशा में भी नहीं है। परिवार समाज की बुनियाद है और इसमें बहुत बदलाब नहीं आ सका है। वह जिन आधारों पर सदियों से टिका रहा है, उन्ही आधारों पर वह आज भी है। जहाँ कहीं ये आधार बदले है, वहां भी एक खास तरह की अवसरवादिता ने जगह बनाई है। भारत के भविष्य का सामना सीधे-सीधे इस बात से है की व्यक्ति बदले, परिवार बदले, समाज बदले और ये सभी मिलकर देश की राजनीती की सोच बदल दें। देश की राजनीतिक जागरूकता को, मतदान के अधिकार को, लोकतंत्र की सफलता को बढ़ाना और घनीभूत होना चाहिए। मगर उसे कम  से कम अब तो अपनी दिशा अपने स्वरूप के बारे में सोचना चाहिए।

Advertisement

यानी कुल मिलाकर कहानी यह है की पांच -छह हजार साल पुराना यह देश अपनी जिस चिरंतनता में निश्चिंत था , उसमें इसकी आने वाली पीढियां निश्चिंत नहीं रह पायेगी। यदि भारत का व्यक्ति न बदला और समाज का गठन न बदला तो इतिहास उसे तोड़ देगा। क्योंकि किसी भी गुजरी सदी की तुलना में अब  भारतीय परिवार जो दबाब है वह दिनोदिन बढ़ने वाला है, मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक, आर्थिक….. हर रूप में। शुतुरमुर्ग अब अपने ही पंखों में छिपकर सुरक्षित नहीं रह सकता है।

आलोक श्रीवास्तव (email: alok.srivastava@dbcorp.in)

अन्य सटीक और विश्वशनीय जानकारी के लिए हमारा पेज लाइक करें :-
Loading...

Related Articles